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सामाजिक न्याय की राजनीति (लैंगिक सन्दर्भ): पार्ट 3 : बिहार और राजनीतिक समावेशन

बिहार में सामाजिक न्याय की राजनीति: लैंगिक सन्दर्भ प्रमुख आयाम 1.     सामाजिक न्याय की राजनीति: बिहार के विशेष सन्दर्भ में 2.     17वीं लोकसभा-चुनाव: सामाजिक न्याय के लैंगिक सन्दर्भ 3.     सामाजिक न्याय की राजनीति और महिलाएँ 4.     लालू यादव और राजद: सामाजिक न्याय की राजनीति (लैंगिक संदर्भ) 5.     नीतीश कुमार और जद(यू): सामाजिक न्याय की राजनीति (लैंगिक संदर्भ) 6.     केन्द्र सरकार की हालिया पहल 7.     बिहार विधानसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व: a. महिलाओं का प्रतिनिधित्व(अबतक) b. बिहार विधानसभा-चुनाव,2020 c.   महिला-विधायकों में कमी d. गिरावट का कारण e. चुनावी एजेंडे में महिलाएँ   सामाजिक न्याय की राजनीति: लैंगिक सन्दर्भ बिहार के विशेष सन्दर्भ में 17वीं लोकसभा-चुनाव: सामाजिक न्याय के लैंगिक सन्दर्भ: सत्रहवीं लोकसभा-चुनाव के परिणामों को सामाजिक न्याय के आलोक में देखा जाए, तो यह हमें आश्वस्त भी करता है और आशंकित भी। इसका एक महत्वपूर्ण प...

वन नेशन, वन इलेक्शन और लोकतान्त्रिक बहुलतावाद

वन नेशन, वन इलेक्शन प्रमुख आयाम 1.     ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ से आशय : 2.     लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खण्डित तारतम्यता 3.     भारतीय प्रधानमंत्री का प्रस्ताव 4.   नीति आयोग और चुनाव आयोग को अनुकूल माहौल बनाने की जिम्मेवारी 5.   अलग-अलग चुनाव के दुष्परिणाम 6.   नीति आयोग के सुझाव 7.   संसद की स्था यी समिति की सिफारि शें 8.   साथ-साथ चुनाव के नुकसान 9.     ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ से आशय: ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का मतलब है भारत में चुनाव-चक्र की इस प्रकार पुनर्संरचना, कि लोकसभा और विधानसभा, दोनों के चुनाव एक ही समय पर साथ-साथ हों; जैसा कि भारतीय राजनीति में सन् 1967 के पहले तक होता था । अब प्रश्न यह उठता है कि आज अचानक से ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ की चर्चा क्यों हो रही है? इसके पीछे क्या तर्क गढ़े जा रहे हैं ? यह विचार भारत के बहुदलीय लोकतंत्र को और बहुदलीय राजनीतिक व्यवस्था को किन रूपों में प्रभावित करेगा? इसका राज्यों के हितों एवं आकांक्षाओं के साथ-साथ राज्यों के विकास पर किस प्रकार असर...