वन नेशन, वन इलेक्शन और लोकतान्त्रिक बहुलतावाद
वन नेशन, वन इलेक्शन प्रमुख आयाम 1. ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ से आशय : 2. लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खण्डित तारतम्यता 3. भारतीय प्रधानमंत्री का प्रस्ताव 4. नीति आयोग और चुनाव आयोग को अनुकूल माहौल बनाने की जिम्मेवारी 5. अलग-अलग चुनाव के दुष्परिणाम 6. नीति आयोग के सुझाव 7. संसद की स्था यी समिति की सिफारि शें 8. साथ-साथ चुनाव के नुकसान 9. ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ से आशय: ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का मतलब है भारत में चुनाव-चक्र की इस प्रकार पुनर्संरचना, कि लोकसभा और विधानसभा, दोनों के चुनाव एक ही समय पर साथ-साथ हों; जैसा कि भारतीय राजनीति में सन् 1967 के पहले तक होता था । अब प्रश्न यह उठता है कि आज अचानक से ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ की चर्चा क्यों हो रही है? इसके पीछे क्या तर्क गढ़े जा रहे हैं ? यह विचार भारत के बहुदलीय लोकतंत्र को और बहुदलीय राजनीतिक व्यवस्था को किन रूपों में प्रभावित करेगा? इसका राज्यों के हितों एवं आकांक्षाओं के साथ-साथ राज्यों के विकास पर किस प्रकार असर...